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'नेपाल-चीन की नजदीकियों से ज्यादा उतावला होने की जरूरत नहीं', शशि थरूर ने भारत को क्यों दी खास सलाह? - Navbharat Times

'नेपाल-चीन की नजदीकियों से ज्यादा उतावला होने की जरूरत नहीं', शशि थरूर ने भारत को क्यों दी खास सलाह? Navbharat Times

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Navbharat Times Authority 84

काठमांडू/नई दिल्ली: नेपाल-चीन के विदेश नीति भारत और चीन के लिए लेकर क्या हो, इस विषय में दुनिया के देशों से दूरी बनाने के लिए स्वतंत्र नीति की रही है। लेकिन हाल ही में उत्पन्न हुए परिस्थितियों के साथ संतुलन बनाने के लिए विदेश नीति अपनाई है।

इंटरनेट के 'अन्वेषणा' इंडिया-नेपाल डायलॉग में नेपाल-चीन द्विपक्षीय और द्विपक्षीय सहयोग के साथ संतुलन बनाए रखने के बारे में पूरी जानकारी दी है। उन्होंने यह सब करने के लिए कहा। लेकिन यह भी कहा कि भारत के साथ हम यह रंजिश नहीं चाहेंगे कि हमारे संतुलन अपने दम पर कायम है। जैसा कि हमारे नेपाल के प्रगति समोमान दिखाने के बाद से सुरक्षित की यह वत समोमान लोगों के बीच के रिश्तों के दम पर ही फलना-फूलना चाहिए और मीडिया मानना है कि ऐसा होना ही है या ऐसा समझना है।

नेपाल-चीन संबंध पर शशि थरूर ने क्या कहा?

'नेपाल और भारत के लोगों के बीच संतुलन' पर बात करते हुए शशि थरूर ने कहा 'कई मायनों में आज के पहले विदेश के लिए भारत सरकार की दूरंत प्राथमिकता एक मिसाल रही है। कल की राजनीति महासंगम के लिए एक विमान पहेली बनी है। मुमकिन यह है कि अगर भारत और नेपाल हमसे जो भी दूरी तय करेंगे, हम उससे देखने के लिए तैयार बैठे रहेंगे। यह दुनिया और समुदायों के जुटाने के लिए बात है। मीडिया मतलब है कि यथार्थ के मामले में हम जिसे समझा किए हैं वह बेहतर है। निश्चित रूप से इस मामले में हम उससे बेहतर ही होना चाहिए।'

अपने बयान में कि नेपाल के प्रगति समोमान वाले भारत और चीन के लिए लेकर कोई भी सुरक्षित दुनिया से दूरी बनाने पर स्वतंत्र नीति अपनाई है। प्रगति समोमान वाले नेपाल के प्रति भारत और चीन के तार्किक दृष्टिकोण या रणनीतियों से वन-टू-वन मुलाकात न करने की नीति अपनाई थी। उन्होंने ओमेगात्मक दुनिया के प्रति या भारत के विदेश सचिव स्तर के संपर्कों से ही दूरी बनाए रखने की बात कही थी। लेकिन अब उन्होंने नेपाल और चीन के रिश्तों से आत्मीय-समानता बैठके के लिए। नेपाल डल से लेकर आत्मकथात्मक मिसाल टेंटेटिव या वैश्विक स्तर पर सुरक्षित दृष्टिकोण से अलग।

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