रूबियो बोले- भारत-ईरान के बीच ट्रेड डील की जानकारी नहीं: तेहरान की मदद करने वाले देशों पर भी प्रतिबंध लगाएंगे - Dainik Bhaskar
रूबियो बोले- भारत-ईरान के बीच ट्रेड डील की जानकारी नहीं: तेहरान की मदद करने वाले देशों पर भी प्रतिबंध लगाएंगे Dainik Bhaskar
First reported 1 week ago · latest update 1 week agoअमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने कहा कि मुझे नहीं लगता कि भारत और ईरान के बीच कोई ट्रेड डील हुई है। उनसे PM मोदी और ईरानी राष्ट्रपति मसूद पजशकियान की मुलाकात को लेकर सवाल किया गया था।
उन्होंने चेतावनी भी दी कि अगर कोई देश ईरान को अमेरिकी प्रतिबंधों से बचने में मदद करेगा, तो अमेरिका उस देश पर भी प्रतिबंध लगा सकता है।
SCO में मोदी और ईरानी राष्ट्रपति की मुलाकात
अमेरिकी विदेश मंत्री का बयान PM मोदी और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पजशकियान की SCO समिट के दौरान हुई मुलाकात के बाद आया है। दोनों नेताओं ने भारत-ईरान संबंध, व्यापार और पश्चिम एशिया के हालात पर चर्चा की थी।
मोदी ने कहा था कि भारत ईरान के साथ अपने पुराने संबंधों को और मजबूत करना चाहता है। दोनों देशों के बीच व्यापार बढ़ाने और नए क्षेत्रों को इसमें शामिल करने पर भी जोर दिया गया था।
मोदी ने कहा था कि भारत BRICS और SCO जैसे मंचों पर ईरान के साथ सहयोग जारी रखेगा। उन्होंने पजशकियान को 12-13 सितंबर को नई दिल्ली में होने वाले BRICS शिखर सम्मेलन में शामिल होने का न्योता भी दिया।
खबर में आगे अमेरिका का ईरान की कमाई के किन 5 रास्तों पर बैन, इससे पहले भास्कर नॉलेज पढ़ेंः
भारत-ईरान में ₹15,960 करोड़ का सालाना कारोबार, भारत का निर्यात ज्यादा
भारत और ईरान के बीच 2024-25 में 1.68 अरब डॉलर (करीब ₹15,960 करोड़) का कारोबार हुआ। इसमें भारत ने ईरान को 1.24 अरब डॉलर का निर्यात किया, जबकि ईरान से 44 करोड़ डॉलर का आयात हुआ। यानी कुल कारोबार में भारत के निर्यात की हिस्सेदारी करीब 74% रही।
ईरान भारत से बासमती खरीदने वाले बड़े देशों में है। अप्रैल 2025 से जनवरी 2026 के बीच भारत ने ईरान को 7.91 लाख टन बासमती चावल निर्यात किया, जिसकी कीमत ₹5,424 करोड़ रही। एक साल पहले इसी अवधि में 6.27 लाख टन बासमती, ₹4,862 करोड़ में भेजा गया था, यानी मात्रा 26% और निर्यात मूल्य 12% बढ़ा।
भारत-ईरान का कारोबार सिर्फ बासमती तक सीमित नहीं है। दोनों देशों के बीच अनाज और दवाओं का कारोबार प्रमुख है। भारत ईरान को चाय, चीनी, मैनमेड फाइबर और इलेक्ट्रिकल मशीनरी भी निर्यात करता है।
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव से शिपिंग और ईरानी बंदरगाहों का काम प्रभावित हुआ। 1 मार्च 2026 तक कांडला पोर्ट पर ईरान जाने वाला 35,962 टन माल अटका था। इसकी कीमत करीब ₹305.67 करोड़ थी। मुंद्रा पोर्ट पर भी 5,676 टन माल, करीब ₹40.72 करोड़ का, फंसा था। इसमें चावल, चाय, दवाएं और मेडिकल मशीनरी शामिल थीं।
ईरान भारत के लिए सिर्फ एक बाजार नहीं है। चाबहार पोर्ट भारत को ईरान और आगे मध्य एशिया से जोड़ने वाला अहम रास्ता है। भारत ने 2024 में चाबहार के शाहिद बेहेश्ती टर्मिनल के संचालन के लिए ईरान के साथ लंबे समय का समझौता किया था।
नई ट्रेड डील से ज्यादा जरूरी मौजूदा कारोबार
31 अगस्त 2026 को मोदी और पजस्कियान की मुलाकात में दोनों देशों के रिश्तों और पश्चिम एशिया की स्थिति पर चर्चा हुई। आधिकारिक बयान में किसी नई ट्रेड डील की घोषणा नहीं हुई।
ऐसे में अभी बड़ा सवाल यह है कि मौजूदा ₹15,960 करोड़ के कारोबार को कैसे जारी रखा जाए और आगे बढ़ाया जाए।
अमेरिका की ईरान पर बढ़ती पाबंदियों का असर भारतीय निर्यात, शिपिंग और चाबहार से जुड़े कारोबारी हितों पर पड़ सकता है। यानी भारत के लिए चुनौती सिर्फ नई ट्रेड डील की नहीं, बल्कि मौजूदा कारोबार को बनाए रखने की भी है।
अमेरिका का ईरान की कमाई के 5 रास्तों पर बैन
दरअसल, अमेरिका ने ईरान की अर्थव्यवस्था के 5 अहम क्षेत्रों पर नए प्रतिबंध लगाए हैं। जिनका इस्तेमाल ईरान दूसरे देशों में अपनी आर्थिक गतिविधियों के लिए करता है।
इनमें डिजिटल एसेट्स (जैसे क्रिप्टोकरेंसी), टेक्नोलॉजी, सोना, एविएशन और शिपिंग सेक्टर शामिल हैं। अमेरिका इन क्षेत्रों के जरिए ईरान की कमाई और अंतरराष्ट्रीय कारोबार को रोकना चाहता है।
यानी अगर कोई देश इन क्षेत्रों में ईरान के साथ ऐसा कारोबार करता है जिससे उसे पैसा या आर्थिक फायदा मिलता है। तो अमेरिका उस देश पर भी प्रतिबंध लगा सकता है या उसे अमेरिकी डॉलर की वित्तीय व्यवस्था से बाहर कर सकता है।
अमेरिका बोला- अब ईरान के पास सिर्फ दो रास्ते बचे
अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने कहा था कि हमने 'ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट' शुरू किया है। यह ईरान और उसके सहयोगी देशों के खिलाफ एक अभियान है।
ईरान के सामने अब सिर्फ दो रास्ते हैं। पहला- पूरी तरह से दुनिया से अलग-थलग पड़ना और गुजारे लायक अर्थव्यवस्था। दूसरा- फिर से सामान्य स्थिति की ओर बढ़ना और वैश्विक अर्थव्यवस्था में फिर से शामिल होने का मौका पाना।
भारत की 4 कंपनियों पर भी प्रतिबंध
अमेरिका ने ईरान से तेल और पेट्रोकेमिकल कारोबार के आरोप में भारत की 4 कंपनियों पर भी प्रतिबंध लगाए हैं। अमेरिकी विदेश विभाग के मुताबिक, इन कंपनियों ने ईरान से पेट्रोलियम और पेट्रोकेमिकल उत्पाद खरीदने या भारत लाने में भूमिका निभाई।
इनमें पोर्टीज पार्टनर्स, सदाशिवा ओवरसीज, पीपी सॉफ्टटेक और प्रकृति इंफ्रा इम्पेक्स इंडिया शामिल हैं। अमेरिका का कहना है कि यह कार्रवाई ईरान की तेल से होने वाली कमाई रोकने और उसके कारोबार से जुड़े नेटवर्क पर दबाव बढ़ाने के लिए की गई है।
2 दिन बाद अमेरिका का ईरान पर फिर मिसाइल हमला, 19 की मौत, 68 घायल
अमेरिका ने 2 दिन बाद फिर ईरान पर हमला किया है। अमेरिकी सेना ने मंगलवार रात सिरिक, खुजस्तान, केश्म द्वीप और बंदर अब्बास में मिसाइल और ड्रोन स्ट्राइक की। ईरान के अनुसार इन हमलों में 19 लोगों की मौत हुई है, जबकि 68 लोग घायल हुए हैं। पूरी खबर पढ़ें…
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