कांग्रेस और अन्य ने UPI पर प्रस्तावित शुल्क को लेकर सरकार की आलोचना की
कांग्रेस और अन्य आलोचकों ने UPI लेनदेन पर संभावित शुल्क को लेकर मोदी सरकार पर निशाना साधा है। विपक्ष ने सरकार से इस निर्णय को वापस लेने की मांग की है, जबकि सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में इसे लेकर तीखी प्रतिक्रियाएं देखी जा रही हैं।
First reported 1 day ago · latest update 2 hours ago
यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) ट्रांजैक्शन पर चार्ज लगाए जाने को लेकर छिड़ी बहस के बीच भारतपे (BharatPe) के पूर्व को-फाउंडर अश्नीर ग्रोवर ने सरकार के फैसले की जमकर आलोचना की है। उन्होंने कहा कि ऐसा कोई भी शुल्क असल में टैक्स वसूलने जैसा होगा। बता दें कि सरकार ने एक नोटिफिकेशन जारी किया है। इस नोटिफिकेशन के अनुसार, दो हजार रुपये तक के यूपीआई पेमेंट पर किसी भी तरह का चार्ज नहीं लगेगा। हालांकि, सरकार ने यह स्पष्ट नहीं किया कि 2,000 रुपये से अधिक के लेनदेन पर शुल्क लागू होगा या नहीं और इसका भुगतान व्यापारियों को करना होगा या नहीं। अब इसी को लेकर बहस छिड़ी हुई है।
CNN-News18 से बात करते हुए अश्नीर ग्रोवर ने कहा कि UPI पर चार्ज लगाने से ग्राहक और व्यापारी वापस कैश की ओर जा सकते हैं, जिससे आखिरकार बैंकों और कारोबारियों के लिए कैश मैनेज करने की लागत बढ़ जाएगी।
ग्रोवर ने कहा, "जो चीज पहले से ही ठीक से काम कर रही है, उसमें आप दखल क्यों दे रहे हैं? आपको हर चीज में दखल देने की क्या जरूरत है? मुफ्त UPI ही असली UPI है। अगर आप UPI के लिए पैसे लेने लगेंगे तो समझ लीजिए कि यह खत्म हो गया-इसे 'टाटा, बाय-बाय' कह दीजिए।"
अश्नीर ग्रोवर ने ₹2000 की लिमिट का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा, "सरकार कह रही है कि ₹2000 से अधिक के ट्रांजैक्शन, कुल ट्रांजैक्शन की संख्या का सिर्फ 4% हैं लेकिन वैल्यू के हिसाब से ये 66% हैं। तो उन्होंने बस एक आसान, गोल-मोल नंबर चुन लिया है, जिस पर वे टैक्स लगा सकते हैं और मौजूदा टैक्स के अलावा लोगों से अधिक पैसे वसूल सकते हैं। इसके पीछे कोई लॉजिक नहीं है।" ग्रोवर ने यह भी चेतावनी दी कि व्यापारी किसी भी संभावित चार्ज का बोझ ग्राहकों पर डाल सकते हैं या उन्हें कई छोटे-छोटे UPI पेमेंट करने के लिए कह सकते हैं।
ग्रोवर ने पूछा कि सरकार UPI पर असल में कौन सी सब्सिडी देती है जिसे अब नए चार्ज के जरिए वसूलने की जरूरत है। उन्होंने UPI के मामले की तुलना भारत के ATM और कैश नेटवर्क को चलाने की लागत से भी की। ग्रोवर ने RBI, बैंकों और NPCI की वित्तीय स्थिति का हवाला देते हुए पूछा कि आखिर UPI की वजह से किसका नुकसान हो रहा है। अशनीर ग्रोवर ने UPI की तुलना देश के ATM और कैश नेटवर्क से भी की। उनके मुताबिक भारत में ATM और कैश लॉजिस्टिक्स नेटवर्क चलाने की सालाना लागत करीब ₹30,500 करोड़ है।
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