Discussions regarding potential UPI transaction charges
There is conflicting reporting regarding the implementation of charges on UPI payments. While some political figures allege external pressure to introduce fees, other reports state that no such proposal has been presented to the parliamentary committee.
First reported 1 day ago · latest update 6 hours from nowबक्सर के सांसद सुधाकर सिंह ने UPI पर प्रस्तावित मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) को लेकर केंद्र की मोदी सरकार पर निशाना साधा है।
उन्होंने इस फैसले को अमेरिकी दबाव से जोड़ते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तंज कसा है।
सांसद ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में लिखा कि UPI ने वीजा और मास्टरकार्ड के आगे सरेंडर नहीं किया है। बल्कि, 56 इंच वाले मोदी जी ने ट्रंप के आगे सरेंडर कर दिया है।
उन्होंने अपने पोस्ट में यूपीआई के बढ़ते इस्तेमाल का जिक्र किया। सांसद ने कहा कि देश में बड़ी संख्या में लोग वीजा और मास्टरकार्ड जैसे कार्ड नेटवर्क के बजाय यूपीआई का इस्तेमाल करने लगे हैं।
''बड़े लेन-देन पर शुल्क की व्यवस्था की''
इससे अमेरिकी कंपनियों के कारोबार पर असर पड़ना स्वाभाविक है। इसी को आधार बनाते हुए उन्होंने केंद्र सरकार के नए शुल्क प्रावधान पर सवाल उठाया। उन्होंने इसे अमेरिकी दबाव में लिया गया फैसला बताया।
सुधाकर सिंह ने आरोप लगाया कि 2,000 रुपये से अधिक के व्यापारी भुगतान पर 0.4 प्रतिशत एमडीआर लगाने का रास्ता खोल दिया गया है।
उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि जिस यूपीआई को भारत की डिजिटल ताकत और डिजिटल इंडिया की बड़ी उपलब्धि के तौर पर पेश किया गया, अब उसी के बड़े लेन-देन पर शुल्क की व्यवस्था की जा रही है।
तेल भी जनता डालेगी और कीमत भी जनता चुकाएगी - सांसद
सांसद ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन 17 सितंबर को लेकर भी इस मुद्दे पर व्यंग्य किया।
उन्होंने लिखा कि प्रधानमंत्री जी ने देशवासियों को ‘आशीर्वाद का दिया’ दिया है। यह दिया जन्मदिन पर एक दिन या एक घंटे के लिए नहीं जलाना है, बल्कि आजीवन जलाना होगा।
सांसद ने कहा कि यूपीआई पर हर बड़े भुगतान के साथ यह ‘दिया’ याद आएगा। उन्होंने कहा, "डिजिटल इंडिया का दिया है साहब, अब तेल भी जनता डालेगी और कीमत भी जनता चुकाएगी।"
हालांकि, प्रस्तावित एमडीआर की व्यवस्था सांसद के राजनीतिक आरोप से अलग तकनीकी रूप से देखी जा रही है।
फीस अधिकतम 300 र प्रति लेन-देन तक सीमित
एनपीसीआई के प्रावधान के अनुसार, 15 अक्टूबर 2026 से 2,000 रुपये से अधिक के चुनिंदा व्यक्ति-से-व्यापारी (पी2एम) यूपीआई लेन-देन पर 0.4 प्रतिशत एमडीआर लागू होगा।
75,000 रुपये या उससे अधिक के लेन-देन पर यह शुल्क अधिकतम 300 रुपये प्रति लेन-देन तक सीमित रहेगा। इस व्यवस्था का मतलब यह नहीं है कि यूपीआई से भुगतान करने वाले हर ग्राहक से सीधे शुल्क वसूला जाएगा।
सरकारी स्पष्टीकरण के मुताबिक एमडीआर भुगतान व्यवस्था में व्यापारी पक्ष से जुड़ा शुल्क है। व्यक्ति से व्यक्ति यानी पी2पी भुगतान पहले की तरह मुफ्त रहेगा। वहीं ₹2,000 तक के पी2एम भुगतान पर भी एमडीआर नहीं लगेगा।
सांसद ने केंद्र सरकार पर उठाए सवाल
सरकार के अनुसार, करीब 96 प्रतिशत पी2एम यूपीआई लेन-देन इस बदलाव से प्रभावित नहीं होंगे। रेलवे, दूरसंचार, बीमा, ईंधन समेत कुछ आवश्यक क्षेत्रों में ₹2,000 से अधिक के भुगतान के लिए 0.4 प्रतिशत की जगह ₹5 का फ्लैट एमडीआर निर्धारित किया गया है।
वहीं सांसद सुधाकर सिंह ने इसी फैसले को अमेरिकी दबाव से जोड़कर केंद्र सरकार की नीतियों पर राजनीतिक सवाल खड़े किए हैं। ऐसे में यूपीआई पर एमडीआर का मुद्दा आने वाले दिनों में राजनीतिक बहस का भी विषय बन सकता है।
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