AIIMS से जुड़ी खबरें: रेजिडेंट डॉक्टर की आत्महत्या और स्वास्थ्य संबंधी सलाह
जोधपुर AIIMS के एक रेजिडेंट डॉक्टर ने इंजेक्शन लगाकर आत्महत्या कर ली है। इसके अतिरिक्त, AIIMS के डॉक्टरों ने छोटे बच्चों में मोबाइल स्क्रीन के दुष्प्रभावों और कील-मुंहासों के उपचार के बारे में जानकारी दी है।
First reported 3 days ago · latest update 3 hours agoलेखक के बारे मेंसुनील पाण्डेयसुनील पाण्डेय, नवभारत टाइम्स (डिजिटल) में बतौर सीनियर जर्नलिस्ट कार्यरत हैं। जनवरी 2021 में टाइम्स ऑफ इंडिया ग्रुप का हिस्सा बने सुनील वर्तमान में NBT ऑनलाइन की बिहार-झारखंड टीम में संपादकीय और रिपोर्टिंग में जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। रणनीतिक न्यूज़ प्लानिंग, सटीक संपादन और धारदार ग्राउंड रिपोर्टिंग उनकी विशेष पहचान है। राजनीति और व्हाइट कॉलर करप्शन जैसे विषयों पर गहरी पकड़ रखने वाले सुनील ने 2005 से शुरू हुए अपने करियर में कई बड़ी खबरें ब्रेक की हैं। जी20 शिखर सम्मेलन (G20 Summit) से लेकर केरल तक के चुनावी बयार को समझा। दिल्ली, बिहार और तेलंगाना में पत्रकारिता के विभिन्न आयामों को अनुभव करने वाले सुनील सोशल मीडिया एक्स (पहले ट्विटर) पर @sunilpandeyjee के जरिए सक्रिय रहते हैं। सुनील का पत्रकारिता करियर प्रिंट, टीवी और डिजिटल मीडिया के अलग-अलग अनुभवों से समृद्ध है, जहां उन्होंने संपादन और ग्राउंड रिपोर्टिंग की महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाई हैं। पटना, दिल्ली और हैदराबाद जैसे महानगरों में उन्होंने कई प्रतिष्ठित हस्तियों का साक्षात्कार किया है। उनकी ग्राउंड रिपोर्ट्स का प्रभाव इतना गहरा रहा है कि कई मौकों पर सरकार को अपनी नीतियों पर पुनर्विचार करने और उनमें सुधार करने के लिए मजबूर होना पड़ा। सुनील पाण्डेय की पारखी नजर राजनीतिक उतार-चढ़ाव और सरकारी नीतियों के आम आदमी पर पड़ने वाले असर के विश्लेषण पर रहता है। डिजिटल युग की मांग को समझते हुए वे अपनी लेखनी और वीडियो, दोनों माध्यमों से नवभारत टाइम्स के पाठकों से जुड़ते हैं। उनमें किसी भी सामान्य खबर को राष्ट्रीय विमर्श (National Narrative) बनाने की अद्भुत क्षमता है। वे केवल समाचार देने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि खबर के पीछे के नैतिक मूल्यों और उसके व्यापक प्रभाव को गहराई से परखते हैं। अपने पत्रकारिता सफर का आगाज सुनील ने प्रतिष्ठित पाक्षिक पत्रिका 'माया' से किया, जिसके बाद उन्होंने विभिन्न समाचार पत्रों के लिए स्वतंत्र स्तंभकार (कॉलमनिस्ट) के रूप में अपनी लेखनी को धार दी। ETV न्यूज की संपादकीय टीम के साथ संपादन और रिपोर्टिंग के गुर सीखने के बाद, उन्होंने ज़ी मीडिया और नेटवर्क 18 जैसे बड़े संस्थानों में एक लंबा समय बिताया। प्रिंट और टीवी न्यूज़ के व्यापक अनुभव के बाद, उन्होंने डिजिटल मीडिया की ओर रुख किया। न्यूज़ इकोसिस्टम की गहरी समझ विकसित की। वर्तमान में वे टाइम्स ऑफ इंडिया ग्रुप के डिजिटल प्लेटफॉर्म 'नवभारत टाइम्स ऑनलाइन' में अपनी धारदार पत्रकारिता को जारी रखे हुए हैं। सुनील पाण्डेय की शैक्षणिक नींव 'पूरब का ऑक्सफोर्ड' माने जाने वाले पटना विश्वविद्यालय में पड़ी। यहां से ग्रेजुएशन और मास्टर के साथ ही उन्होंने पत्रकारिता की डिग्री भी प्राप्त की। वे समाचारों के विभिन्न स्रोतों के विश्लेषणात्मक अध्ययन और सोशल मीडिया के दुष्प्रभावों जैसे गंभीर विषयों पर अपनी लेखनी और व्याख्यानों के माध्यम से निरंतर विचार साझा करते रहते हैं। पत्रकारिता करियर के दौरान कई अवॉर्ड से सुनील पाण्डेय को सम्मानित किया जा चुका है।... और पढ़ें
Edited by: सुनील पाण्डेय|नवभारतटाइम्स.कॉम•26 Sept 2026, 2:41 pm IST
AIIMS पटना के अध्ययन में खुलासा हुआ है कि बिहार के 60 प्रतिशत युवा किशोरावस्था बीतने के बाद भी मुंहासों की गंभीर समस्या से जूझ रहे हैं। डॉक्टरों के अनुसार, बिना डॉक्टरी सलाह स्टेरॉयड क्रीम का उपयोग, बढ़ता मोटापा और अत्यधिक जंक फूड का सेवन इसका मुख्य कारण बन रहा है।
मोटापा और गलत क्रीम से मुंहासे की समस्या काफी बढ़ गई है। शरीर में चर्बी बढ़ने से हार्मोन का स्तर बढ़ जाता है। स्कीन काफी ऑयली होने लगता है। इसके कारण मुंहासे निकलते हैं। कई क्रीम में मौजूद केमिकल का चेहरे की त्वचा पर असर पड़ता है।
डॉ स्वेतालिना प्रधान, एचओडी, चर्म रोग विभाग, AIIMS पटना
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