CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन और कानूनी याचिकाएं
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन हुए हैं और सुप्रीम कोर्ट में उनके खिलाफ याचिका दायर की गई है। प्रदर्शन के दौरान गौरव गोगोई को हिरासत में लिया गया और विभिन्न संगठनों द्वारा महाभियोग की मांग की जा रही है।
First reported 2 days ago · latest update 19 hours agoProtest against EC LIVE: एसआईआर की प्रक्रिया को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार सवालों के घेरे में आ गए हैं। कांग्रेस के कार्यकर्ता कई शहरों में सड़कों पर उतर चुके हैं और सीईसी ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा मांग रहे हैं। एक रिपोर्ट में दावा किया गया था कि उनके दो जूनियर चुनाव आयुक्त उनकी बात पर सहमत नहीं थे और इसलिए 10 महीने में 14 बार आपत्ति जताई। इस रिपोर्ट के बाहर आने के बाद सीजेपी और विपक्ष दोनों ही मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर आक्रामक हो गए। कांग्रेस ने देशभर में चुनाव आयोग के दफ्तरों के बाहर प्रदर्शन का ऐलान कर दिया। नई दिल्ली में चुनाव आयोग की बिल्डिंग के सामने विरोध प्रदर्शन को देखते हुए सुरक्षा कड़ी कर दी गई है।
वही भारतीय युवा कांग्रेस ने भी 5. रायसीना रोड से जंतर मंतर तक मार्च का ऐलान किया है। सीजेपी के संयोजक अभिजीत दीपके ने सीईसी ज्ञानेश कुमार को 48 घंटे के अंदर इस्तीफा देने का अल्टिमेटम दे दिया है। उन्होंने कहा कि अगर ज्ञानेश कुमार इस्तीफा नहीं देते तो फिर 2 अक्टूबर से देश्यापी आंदोलन होगा।
01:49 PM- पटना में CEC के खिलाफ कांग्रेस का जबरदस्त प्रदर्शन शुरू हो गया है। पुलिस ने उन पर वाटर कैनन भी दागे हैं।
01:38 PM- CEC के खिलाफ प्रदर्शन के बीच कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई हिरासत में लिए गए।
01: 30 PM- CEC पर विवाद के बीच RJD सांसद मनोज कुमार झा ने शुक्रवार को कहा है कि आयोग को लेकर चल रहा विवाद अब सिर्फ राजनीतिक दलों और संसद तक सीमित नहीं रह गया है। यह मामला अब सड़कों तक पहुंच गया है। मनोज झा ने एएनआई से कहा, “यह मामला अब सिर्फ सत्ता पक्ष और विपक्ष या संसद तक सीमित नहीं है, अब यह सड़कों तक पहुंच गया है। लोग सोच रहे हैं कि उनके साथ और उनके वोट के साथ क्या हो रहा है। और जब कोई मुद्दा इस तरह का रूप ले लेता है, तो बहुत बड़े स्तर पर कई विकल्प खुल जाते हैं।”
01: 10 PM- इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के आधार पर सुप्रीम कोर्ट में सीईसी ज्ञानेश कुमार के खिलाफ याचिका फाइल की गई है। इसमें कहा गया है कि फॉर्म 6 को रीस्टोर किया जाए और 13 करोड़ वोट डिलीट होने के बार में एसआईटी से जांच करवाई जाए।
01: 05 PM- उत्तराखंड के देहरादून में भी कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने चुनाव आयोग के दफ्तर के बाहर प्रदर्शन शुरू किया है। यहां बैरिकेडिंग लगाई गई है और पुलिस बल की तैनाती है। कांग्रेस के कार्यकर्ता सीईसी ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा मांग रहे हैं।
12: 55 PM- कोलकाता में भी चुनाव आयोग के खिलाफ कांग्रेस का प्रदर्शन शुरू हो गया है। कांग्रेस के कार्यकर्ता सड़क पर उतर चुके हैं। इसी तरह लखनऊ, दिल्ली और अन्य शहरों में भी कांग्रेस के कार्यकर्ता सड़कों पर उतर रहे हैं।
12: 45 PM- अभिजीत दीपके ने सवाल उठाया कि क्या विपक्षी दल इसलिए चुनाव लड़ते रहते हैं क्योंकि उन्हें डर है कि चुनाव से दूर रहने पर उनका राजनीतिक अस्तित्व खत्म हो सकता है। उन्होंने कहा, '' शायद आप इसलिए चुनाव लड़ते रहते हैं क्योंकि आपको डर है कि अगर आपने चुनाव नहीं लड़ा, तो आपका अस्तित्व ही खत्म हो जाएगा। लेकिन जब वोट चुराए जा रहे हों, आपके विधायकों और सांसदों को अपने पाले में किया जा रहा हो और आपकी पार्टियों में फूट डाली जा रही हो, तब आप किस तरह के अस्तित्व को बचाने की कोशिश कर रहे हैं?''
12: 37 PM- लखनऊ में कांग्रेस चुनाव आयोग के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रही है। वहीं समाजवादी पार्टी कहीं प्रदर्शन नहीं कर रही है। कांग्रेस के प्रदर्शन में अजय राय भी शामिल है। यह प्रदर्शन कांग्रेस के कार्यालय के बाहर ही हो रहा है। कांग्रेस के एक सीनियर नेता ने कहा, अभी तो लोग आ ही रहे हैं। एक घंटे बाद प्रदर्शन शुरू होगा।
12: 33 PM- बीजू जनता दल (बीजद) के अध्यक्ष नवीन पटनायक ने शुक्रवार को मांग की कि मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार को तत्काल इस्तीफा देना चाहिए और मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) पर फिर से विचार किया जाना चाहिए। पटनायक ने विधानसभा के बाहर संवाददाताओं से कहा, "चुनाव आयुक्तों और मुख्य चुनाव आयुक्त के बीच गंभीर मतभेदों के कारण मुख्य चुनाव आयुक्त को तुरंत इस्तीफा दे देना चाहिए और पूरी एसआईआर प्रक्रिया पर गहन रूप से फिर से विचार किया जाना चाहिए।"
12: 20 PM- प्रियंका गांधी ने कहा, निर्वाचन आयोग विवाद को लेकर कांग्रेस पर भाजपा का हमला 'पुरानी और कमज़ोर कहानी' है। कथित चुनावी अनियमितताओं से जुड़े 'तथ्य, सबूत' हैं।
12: 08 PM- कॉकरोच जनता पार्टी के संयोजक अभिजीत दीपके ने कहा है कि अगर कल तक यानी शनिवार तक सीईसी ज्ञानेश कुमार इस्तीफा नहीं देता हैं तो फिर 2 अक्टूबर से देशव्यापी आंदोलन शुरू हो जाएगा। उन्होंने कहा कि गांधी जयंती पर लोकतंत्र को बचाने का संकल्प करना है।
12:00 PM- एसआईआर को लेकर चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त पर उठे सवालों पर केंद्रीय मंत्री चिराग पासवा ने कहा कि सरकार में होते हुए मैं किसी का बचाव नहीं करना चाहता। चुनाव आयोग एक स्वायत्त संस्था है और अगर उसपर सवाल उठे हैं तो चुनाव आयोग की जिम्मेदारी है और खासकर मुख्य चुनाव आयुक्त की कि वह अपना पक्ष रखें। मैं इसको लेकर बिल्कुल चिंतित नहीं हूं कि विपक्ष क्या कह रहा है। विपक्ष का काम है विरोध करना और आरोप लगाना। उन्हें अपनी राजनीति करने दीजिए। सीईसी को विपक्ष को संतुष्ट करने के लिए कुछ नहीं करना चाहिए केवल लोगों को भरोसे में लेना चाहिए। यह लोकतंत्र की सुंदरता है।
11: 46 AM- मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को लेकर शुक्रवार को जम्मू-कश्मीर विधानसभा में जमकर हंगामा हुआ। सदन की कार्यवाही शुरू होते ही कांग्रेस विधायकों ने खड़े होकर नारेबाजी शुरू कर दी और चुनाव आयोग के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया। कांग्रेस विधायक निजामुद्दीन भट, इरफान हफीज लोन और इफ्तिखार अहमद ने पोस्टर लहराए, जिन पर लिखा था, “वोट बचाओ, लोकतंत्र बचाओ।”
11: 40 AM- मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कांग्रेस ने शुक्रवार को अपना विरोध और तेज कर दिया है। पार्टी ने दिल्ली में पोस्टर लगाकर ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग की है। दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी (DPCC) के ओबीसी विभाग की ओर से शुक्रवार को लगाए गए पोस्टरों पर लिखा था, “ज्ञानेश कुमार हटाओ, चुनाव आयोग बचाओ।”
11: 20 AM- छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर गंभीर आरोप लगाते हुए चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली की निष्पक्ष जांच की मांग की है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि एसआईआर की प्रक्रिया के दौरान बड़े पैमाने पर मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए और मुख्य चुनाव आयुक्त ने अपने पद के अनुरूप निष्पक्षता से काम नहीं किया। उन्होंने आरोप लगाया कि यह पूरी प्रक्रिया केंद्र सरकार के शीर्ष नेतृत्व के इशारे पर संचालित की गई। उन्होंने चुनावी प्रक्रिया और मतदाता सूचियों को लेकर उठे सवालों की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच कराने तथा जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।
11: 00 AM- इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट पार्ट 2 के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट के गोवा के डिलीट किए गए वोटरों की अपील पर कार्रवाई करने के निर्देश के बाद भी चुनाव आयोग के स्तर पर यह अटक गया और उन नामों को दोबारा शामिल नहीं किया गया। बीते दिनों एक रिपोर्ट में यह भी कहा गया था कि पश्चिम बंगाल में अगर अपीलेट ट्राइब्यूनल इसी गति से काम करता रहा तो अगले 12 साल में भी सभी मामलों का निपटारा नहीं हो पाएगा।
10: 40 AM- छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने बीती देर रात कांग्रेस नेता राहुल गांधी के चुनाव आयोग और चुनाव प्रक्रिया को लेकर लगाए गए आरोपों पर पलटवार करते हुए कहा कि चुनावी पराजय के बाद कांग्रेस अपनी नीतियों, नेतृत्व और कार्यशैली पर आत्ममंथन करने के बजाय जनादेश पर सवाल उठा रही है। पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, "कांग्रेस जब चुनाव जीतती है तो उसे चुनावी व्यवस्था और ईवीएम सही नजर आती है, लेकिन हारने पर कभी ईवीएम, कभी एसआईआर और अब चुनाव आयोग पर सवाल खड़े किए जाते हैं।"
10: 30 AM- अभिजीत दीपके ने यहां तक आरोप लगाया कि बीजेपी के भी कई नेता ज्ञानेश कुमार की व जह से हार गए। सीजेपी ने तीन मांगें रखी हैं। पहली मांग है कि एसआईआर की प्रक्रिया की स्वतंत्र जांत की जाए। दूसरी मांग है कि पहले वाली मतदाता सूची बहाल की जाए। इसते अलावा तीसरी मांग है कि मुख्य निर्वाचन आयुक्त और निर्वाचन आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया में सुधार किया जाए।
10: 20 AM- सीजेपी के संयोजक अभिजीत दीपके ने विपक्ष से पूछा है कि जब चुनावों में धांधली होती है तो वे चुनाव लड़ते क्यों हैं। अभिजीत दीपके ने दावा किया कि ममता बनर्जी, स्टालिन और पिनारायी विजयन समेत विपक्ष के नेताओं की सीटों पर बड़ी संख्या में वोट काटे गए।
10: 15 AM- कांग्रेस महासचिव महासचिव जयराम रमेश ने 'एक्स' पर एक पोस्ट में पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी और प्रधानमंत्री मोदी की तुलना करते हुए कहा, ''एक प्रधानमंत्री ने जेन-जी को वोट का अधिकार दिया, दूसरे ने उसे छीनने की कोशिश की।'' उन्होंने कहा कि एक प्रधानमंत्री ने दिसंबर, 1988 में संसद के शीतकालीन सत्र में संविधान के अनुच्छेद 326 में संशोधन करके मतदान की न्यूनतम आयु 21 वर्ष से घटाकर 18 वर्ष कर दी थी। उनके मुताबिक, यह ऐसा कदम था जिसने युवाओं को सशक्त किया। संविधान (61वां संशोधन) अधिनियम, 1988 के तहत अनुच्छेद 326 में 21 वर्ष की जगह 18 वर्ष की आयु का प्रावधान किया गया था।
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