Political rhetoric intensifies in Uttar Pradesh and Maharashtra
In Uttar Pradesh, CM Yogi Adityanath criticized the Samajwadi Party, alleging that mafia elements controlled the government prior to 2017. Meanwhile, in Maharashtra, Sanjay Raut described an upcoming protest march as a struggle to protect democracy, comparing it to the 1857 uprising.
First reported 2 days ago · latest update 1 hour agoउत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राज्य की कानून-व्यवस्था को लेकर पूर्ववर्ती समाजवादी पार्टी सरकार पर कड़े प्रहार किए हैं। उत्तर प्रदेश पुलिस के एक सम्मान समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने दावा किया कि वर्ष 2017 से पहले राज्य में माफियाओं का वर्चस्व था और पुलिस उनके सामने असहाय महसूस करती थी। उन्होंने आरोप लगाया कि उस दौरान प्रदेश के हर जिले में अपराधियों की समानांतर सरकारें चलती थीं और दंगाइयों का बोलबाला था।
मुख्यमंत्री ने कहा कि 2017 से पूर्व पुलिस की स्थिति अत्यंत दयनीय थी और उन्हें माफियाओं के दबाव में काम करना पड़ता था। यह बयान ऐसे समय में आया है जब राज्य में 2027 के आगामी विधानसभा चुनावों को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। कानून-व्यवस्था और माफियाओं के मुद्दे पर मुख्यमंत्री और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के बीच जुबानी जंग भी देखी जा रही है।
दूसरी ओर, देश के अन्य हिस्सों में राजनीतिक विरोध प्रदर्शनों का दौर जारी है। शिवसेना (यूबीटी) नेता संजय राउत ने केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ तीखा रुख अपनाते हुए इसे लोकतंत्र बचाने की लड़ाई करार दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान शासन लोकतांत्रिक संस्थाओं, चुनावी प्रक्रियाओं और नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों को कमजोर करने का प्रयास कर रहा है।
संजय राउत ने इस विरोध प्रदर्शन की तुलना 1857 के विद्रोह से करते हुए कहा कि यह तानाशाही, चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और सांसदों-विधायकों को तोड़ने की कोशिशों के खिलाफ एक सामूहिक प्रतिक्रिया है। उन्होंने दावा किया कि चुनाव आयोग और सुप्रीम कोर्ट जैसी संस्थाओं को प्रभावित किया जा रहा है, जिसके विरोध में पूरे देश में आक्रोश व्याप्त है।
इस विरोध मार्च को उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे का संयुक्त समर्थन प्राप्त है। शिवसेना (यूबीटी) के सांसद अरविंद सावंत ने कहा कि दोनों भाइयों का एक साथ आना इस आंदोलन को नई मजबूती प्रदान करता है। उन्होंने इसे संविधान और लोकतंत्र की रक्षा के लिए एक बड़ा कदम बताते हुए कहा कि चुनाव आयोग के काम करने के तरीके और कथित भ्रष्टाचार के खिलाफ यह प्रदर्शन पूरे भारत में एक बड़ा मुद्दा बन गया है।
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