Nana Patekar Death: 60 साल के बाद कार्डियक अरेस्ट का खतरा कितना बढ़ जाता है? जानें बचाव के 5 तरीके - NDTV India
Nana Patekar Death: 60 साल के बाद कार्डियक अरेस्ट का खतरा कितना बढ़ जाता है? जानें बचाव के 5 तरीके NDTV India
First reported 1 day ago · latest update 1 day ago
हाल ही में अभिनेता नाना पाटेकर के कार्डियक अरेस्ट के कारण निधन की खबर के बाद दिल की सेहत और अचानक होने वाले कार्डियक अरेस्ट को लेकर चर्चा तेज हो गई है. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, 75 वर्षीय अभिनेता को गंभीर कार्डियक अरेस्ट हुआ था और उन्हें बचाने के लिए CPR भी दिया गया, लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सका. देशभर में बुजुर्गों के बीच कार्डियक अरेस्ट और दिल की बीमारियों के मामले बढ़ रहे हैं. 60 साल की उम्र के बाद अचानक कार्डियक अरेस्ट का खतरा बढ़ सकता है, खासकर अगर हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज और हाई कोलेस्ट्रॉल जैसी समस्याएं कंट्रोल में न हों. ऐसे में सवाल है कि 60 के बाद कार्डियक अरेस्ट से बचने के लिए क्या करें? कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. शंकर माचिगर बताते हैं कि नियमित जांच, दवाओं का सही इस्तेमाल और स्वस्थ जीवनशैली से दिल को स्वस्थ रखने में मदद मिल सकती है.
उम्र बढ़ने के साथ कार्डियक अरेस्ट या हार्ट अटैक का खतरा भी बढ़ सकता है. इसलिए 60 साल से अधिक उम्र के लोगों के लिए समय-समय पर दिल की जांच करवाना और स्वस्थ जीवनशैली अपनाना बहुत जरूरी है. केवल बढ़ती उम्र ही दिल की बीमारी का कारण नहीं है. हाई ब्लड प्रेशर, बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रॉल, डायबिटीज, व्यायाम की कमी और सीने में दर्द या सांस फूलने जैसे लक्षणों को नजरअंदाज करना भी दिल के लिए खतरा बढ़ा सकता है.
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इसलिए सभी लोगों, खासकर बुजुर्गों को अपने दिल को स्वस्थ रखने के लिए संतुलित और स्वस्थ जीवनशैली अपनानी चाहिए.
अगर हाई ब्लड प्रेशर, बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रॉल और डायबिटीज जैसी समस्याओं को सही तरीके से कंट्रोल नहीं किया जाता है, तो ये धीरे-धीरे दिल और शरीर की रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंचा सकती हैं. कई बार इन समस्याओं के लक्षण आसानी से दिखाई भी नहीं देते हैं और अंदर ही अंदर शरीर को नुकसान होता रहता है.
इसलिए बुजुर्गों को नियमित रूप से ब्लड प्रेशर, ब्लड शुगर और कोलेस्ट्रॉल की जांच करवानी चाहिए. डॉक्टर ने जो दवाएं बताई हैं, उन्हें समय पर लेना चाहिए. डॉक्टर से बात किए बिना दवाएं बंद नहीं करनी चाहिए और न ही उनकी मात्रा में बदलाव करना चाहिए.
60 साल से अधिक उम्र के लोगों को डॉक्टर की सलाह के अनुसार नियमित रूप से ब्लड प्रेशर, ब्लड शुगर/HbA1c और कोलेस्ट्रॉल की जांच करवानी चाहिए. अगर दिल की धड़कन तेज या अनियमित महसूस हो, सीने में दर्द या किसी तरह की परेशानी हो, चक्कर आए या सांस लेने में तकलीफ हो, तो डॉक्टर ECG कराने की सलाह दे सकते हैं. अगर डॉक्टर को लगता है कि दिल की बनावट या उसके काम करने के तरीके में कोई समस्या हो सकती है, तो इकोकार्डियोग्राम भी किया जा सकता है. समय पर जांच करवाने से दिल से जुड़ी किसी समस्या का जल्दी पता लगाने में मदद मिल सकती है.
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हाई ब्लड प्रेशर, ब्लड शुगर और कोलेस्ट्रॉल को कंट्रोल करने के लिए डॉक्टर ने जो दवाएं बताई हैं, उन्हें नियमित रूप से लेना चाहिए. दवा की कोई खुराक अपनी मर्जी से नहीं छोड़नी चाहिए.
बुजुर्गों को ज्यादा समय तक एक ही जगह बैठे रहने या लगातार लेटे रहने से बचना चाहिए. रोजाना थोड़ा चलना-फिरना और हल्की स्ट्रेचिंग करना शरीर के लिए फायदेमंद हो सकता है. नियमित शारीरिक गतिविधि से दिल की फिटनेस बनाए रखने, मांसपेशियों को मजबूत रखने और शरीर को चलाने-फिराने में मदद मिल सकती है. इससे बुजुर्गों को रोजमर्रा के काम करने में भी आसानी हो सकती है. हालांकि, बुजुर्गों को बहुत ज्यादा या कठिन व्यायाम नहीं करना चाहिए. कोई भी नया व्यायाम या फिटनेस रूटीन शुरू करने से पहले डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है. अगर कोई व्यक्ति स्ट्रेंथ ट्रेनिंग या योग करना चाहता है, तो इसे किसी विशेषज्ञ की देखरेख में करना बेहतर है.
सीने में दर्द या दबाव महसूस होना, अचानक सांस फूलना, बेहोशी, बिना किसी कारण बहुत ज्यादा कमजोरी महसूस होना, दिल की धड़कन का अचानक तेज या अनियमित होना और अचानक चक्कर आना जैसे लक्षणों को केवल उम्र बढ़ने का असर समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. ऐसे लक्षण दिखाई देने पर डॉक्टर से संपर्क करना जरूरी है. इन लक्षणों को समय पर पहचानना और सही समय पर डॉक्टर से सलाह लेना बहुत महत्वपूर्ण है.
वरिष्ठ नागरिकों को अपने दिल को स्वस्थ रखने और हृदय से जुड़ी समस्याओं के खतरे को कम करने के लिए नियमित स्वास्थ्य जांच करवानी चाहिए, डॉक्टर की सलाह का पालन करना चाहिए, दवाएं समय पर लेनी चाहिए और अपनी क्षमता के अनुसार नियमित शारीरिक गतिविधि करनी चाहिए.
बहुत से लोग कार्डियक अरेस्ट और हार्ट अटैक को एक ही मानते हैं, लेकिन दोनों अलग स्थितियां हैं. हार्ट अटैक में दिल तक खून पहुंचाने वाली नसों में रुकावट आती है, जबकि कार्डियक अरेस्ट में दिल अचानक धड़कना बंद कर देता है. हार्ट अटैक कई बार कार्डियक अरेस्ट का कारण भी बन सकता है.
विशेषज्ञ के बारे में : डॉ. शंकर माचिगर मुंबई के अपोलो स्पेक्ट्रा अस्पताल में कार्डियोलॉजिस्ट हैं. उन्हें हृदय रोगों की पहचान, उपचार और रोकथाम का व्यापक अनुभव है. वह विशेष रूप से हार्ट अटैक, कार्डियक अरेस्ट, हाई ब्लड प्रेशर, कोलेस्ट्रॉल और वरिष्ठ नागरिकों के हृदय स्वास्थ्य से जुड़े मामलों पर सलाह देते हैं.
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